कविताएं जो आपको जरूर पढ़नी चाहिए

मशहूर कविताएं और उनके कवि                

नमस्ते दोस्तों उम्मीद करते हैं आप लोग काफ़ी अच्छे होंगे और ख़ुश होंगे.

हम इस पोस्ट में कुछ बेहतरीन कविताएं और गजल पेश की हैं उम्मीद करते हैं शायद आपको पसंद आये.

अगर पसंद आये तो हमें जरूर बताये कमैंट्स द्वारा ☺️


1.-सभी फूलों को हवाओं ने जूठा कर दिया था प्रिये! /- पराग पावन



सभी फूलों को हवाओं ने जूठा कर दिया था प्रिये!

तो मैं ख़ाली हाथ आया हूँ


मैंने तुम्हारे लिए तुमसे एक कविता का वादा किया था

पर उसे पूरा करने की असमर्थता काई की तरह फैलती जा रही है


शब्दों के अर्थों ने मेरे वक़्त को धोखा दिया है

मैंने जिसे देश समझकर प्यार किया वह विचारों का क़त्लगाह था

मैंने जिसे जूता कहा वह मेरे राहों का जासूस था

मैंने जिसे छत माना वह धूप और बारिश की दलाल निकली अंत में


कोई भी चीज़ अपनी जगह पर सलामत नहीं है

तितली को तितली कहने में ख़तरा है

आग को आश्वस्त होकर आग नहीं कहा जा सकता


यह ऐसा समय है प्रिये!

चाँद जुगनू के घर दस्तख़त करने जाता है

और नदियाँ कुओं के लिए महाकाव्य लिखने में व्यस्त हैं

सोहर मर्सिये से यारी करना चाहता है

और ओस धूप की दयालुता पर फ़िदा हुई जाती है

यह ऐसा समय है प्रिये!


तुमने जब कहा कि इधर ब्रह्मपुत्र के पाट बढ़ आए हैं

इधर ब्रह्मपुत्र अधिक हत्यारिन हुई है

मैंने कहा इसे अभिधा में समझने की भूल मत करना

तुमने जिस मासूमियत से एक मोर से मोरपंख माँगा

मेरी आत्मा फफक कर रो पड़ी

मैं आजकल हर सुंदर और कोमल चीज़ को देखकर डरता हूँ

यह ऐसा समय है प्रिये!


सभी फूलों को हवाओं ने जूठा कर दिया था

यदि वे साबुत भी होते तो फूलों पर उनका हक़ है

हमारे पसीने और लहू के जाये फूलों पर भी उनका ही हक़ है

हर शाख़ पर, हर डाल पर

हर गेरुए पर, हर लाल पर

हर जड़ और ज़मीन पर

तमाशे पर, तमाशबीन पर

उनका ही हक़ है

एक कवि ने तीन दशक पहले पूछा था

मिट्टी, कुआँ, तालाब, देश में-से कुछ हमारा भी है?

तब से लेकर आज तक सारे कवि ख़ामोश हैं

मैं अपने पुरखों की तरह युगों से अभिशप्त हूँ ख़ाली हाथ आने के लिए

तो ख़ाली हाथ आया हूँ

सभी फूलों को हवाओं ने जूठा कर दिया था प्रिये!


#paragpawan



2.- वसीम बरेलवी 


जहाँ दरिया कहीं अपने किनारे छोड़ देता है

कोई उठता है और तूफ़ान का रुख़ मोड़ देता है


मुझे बे-दस्त-ओ-पा कर के भी ख़ौफ़ उस का नहीं जाता

कहीं भी हादिसा गुज़रे वो मुझ से जोड़ देता है


बिछड़ के तुझ से कुछ जाना अगर तो इस क़दर जाना

वो मिट्टी हूँ जिसे दरिया किनारे छोड़ देता है


मोहब्बत में ज़रा सी बेवफ़ाई तो ज़रूरी है

वही अच्छा भी लगता है जो वा'दे तोड़ देता है


#waseembarelvi 


2. सुदर्शन फ़किर


सामने है जो उसे लोग बुरा कहते हैं

जिस को देखा ही नहीं उस को ख़ुदा कहते हैं


ज़िंदगी को भी सिला कहते हैं कहने वाले

जीने वाले तो गुनाहों की सज़ा कहते हैं


फ़ासले उम्र के कुछ और बढ़ा देती है

जाने क्यूँ लोग उसे फिर भी दवा कहते हैं


चंद मासूम से पत्तों का लहू है 'फ़ाकिर'

जिस को महबूब की हाथों की हिना कहते हैं


#sudarshanfakir 

#कविताएँ 


3.-सफल आदमी / भगवत रावत 


सफल आदमी के चेहरे पर

उसकी उम्र की जगह लिखा होता है

सफल आदमी

वह नायक बनकर निकलता है अपने बचपन से

और याद करता है उन्हें

जो पड़े रह गए वहीं के वहीं

कि एक वही निकल पाया ऊपर

केवल अपने बलबूते पर


वह अक्सर सोचता है उन चीज़ों के बारे में

जिन्हें होना चाहिए था केवल उसके जीवन में

वह उस दौड़ में कभी शामिल नहीं होता

जहाँ पराजय का सुख होता है


सफल आदमी में इतनी प्रतिभा होती है

कि वह चाहता तो जो वह है

उसके अलावा

कुछ और भी हो सकता था

लेकिन वह ऐसा कुछ नहीं होता

वह केवल एक सफल आदमी होता है


सफल आदमी के बारे में

हम सब कुछ जानते हैं

केवल उसका दुख नहीं जान पाते।


#bhagwatrawat 

#कविताएँ #kavitaaayein

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